कश्मकश's image
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किसी भी शख़्स को बिल्कुल बेकार नहीं होना चाहिए,
साथ ये कि,हद से ज्यादा भी होशियार नहीं होना चाहिए।

एक अजीब कश्मकश है, आते दुश्मन को देखकर,
अशशा हो साथ में कोई, हथियार नहीं होना चाहिए।

डर था जो मुझको पहले, डर है बाना वह आज भी,
दिल ये किसी के इश्क में, गिरफ़्तार नहीं होना चाहिए।

निकली जो बात ज़बान से, जो फैली है सब जगह,
किसी इंसान को बिल्कुल अख़बार नहीं होना चाहिए।

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