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*पश्चाताप*

हमने कहां किसी से बैर किया,

हमने तो सदा सबको प्यार दिया,

रिश्तों को निभाने में खुद को डुबो दिया,

फिर भी अपनो ने हमें खुद गर्ज बना दिया,

वक्त बीत जाने पर कोई हमराह नही होता,

गुरबत में कभी कोई साथ नहीं देता

अपने लिए तो वक्त से लड़ना होता है

औरों से कहां जीवन का अंजाम होता है ,

अपने को अपना बताकर पीछे से विष बोता है,

काश , पहले मुझे क्यूं समझ नहीं आया,

अब सोच कर मन है घबराया।

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