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"जीवन के रंग"

जीवन तेरे रूप अनेक,

कभी हंसाए कभी रूलाए,

पल-पल में कई ख्वाब दिखाए,

उठती गिरती लहरों सा वेष,

जीवन तेरे रूप अनेक,

ना कोई दोस्त ना कोई यार,

दुनिया है बस एक व्यापार,

लाभ हानि के इस खेल में,

इंसान के कई रूप हैं देख,

जीवन ??????????

भौतिकता की चकाचौंध में,

मानवता के बदले वेष,

रिश्तों की दिवार ढह गये,

जंजीर प्रेम के बिखर गये,

पल -पल बदले वेष,

जीवन तेरे रूप अनेक#

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