बहुत प्सासे लोग हैं कतरा भर से मचल गए's image
Poetry1 min read

बहुत प्सासे लोग हैं कतरा भर से मचल गए

मारूफ आलममारूफ आलम August 31, 2021
Share1 Bookmarks 43 Reads1 Likes

रास्तों के बवंडर कुछ इस तरह उछल गए

जिनकी जद मे आकर काफिले कुचल गए


बुतों की नक्काशियां भी छुपा न सकी उन्हें

बेहरूपिये रूप मे कुछ देर रहे,फिर ढल गए


उन्हीं की आमद से हरम की राते बदल गईं

उन्ही की आमद से हरम के दिन बदल गए


तुझे देखकर यादों की कुछ ऐसी हुड़क उठी

बेदम आंखों मे जैसे कि जुगनूं से जल गए


हो अहसान अगर समंदर लबों पे आन पड़े

बहुत प्यासे लोग हैं कतरा भर से मचल गए

मारूफ आलम

©













No posts

Comments

No posts

No posts

No posts

No posts