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जिंदगी का मेरे ये फसाना रहा

Manoj Kumar MishraManoj Kumar Mishra May 29, 2022
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जिंदगी का मेरे ये फसाना रहा
अपनों में भी मैं बेगाना रहा

तिनका-तिनका जुटा के बना आशियाना
बड़े अरमानों से था बुना ताना-बाना
मेरी खुशियों को किसकी नजर लग गई
एक चिंगारी घर पर मेरे गिर गई
आंधियों को उसी पल में आना रहा

जिंदगी का मेरे ये फसाना रहा
अपनों में भी मैं बेगाना रहा

मैं दीवाना था वो थी दीवानी मेरी
प्यार की खूबसूरत थी कहानी मेरी
मेरी जान मुझसे जुदा हो गई
खा कर कसमे वफा की बेवफा हो गई
प्यार में भी यही दिन दिखाना रहा

जिंदगी का मेरे ये फसाना रहा
अपनों में भी मैं बेगाना रहा

बंजर जमी का एक हिस्सा हूं मैं
दुखद अंत का एक किस्सा हूं मैं
रंज और गमों से अंजाना नहीं
खुशियों का घर मेरेआना नहीं
मेरा घर ही गमों का ठिकाना रहा

जिंदगी का मेरे ये फसाना रहा
अपनों में भी मैं बेगाना रहा

रास्तों से मैं पत्थर हटाता गया
कांटे चुन-चुन सुमन मैं बिछाता गया
रश्में जहां यूं निभाई गई
झोली कांटो भरी मेरी पाई गई
मुश्किल से दामन बचाना रहा

जिंदगी का मेरे ये फसाना रहा
अपनों में भी मैं बेगाना रहा

        Manoj Mishra 

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