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बिछड़ते है सनम से जब

Manoj Kumar MishraManoj Kumar Mishra June 30, 2022
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मोहब्बत तन से ना हो के
मोहब्बत मन से होते हैं
बिछड़ते है सनम से जब
तो ये दिन-रात रोते है।

मोहब्बत रूप ना देखें
मोहब्बत धूप में तपते है
ये अपने प्यार के खातिर
जहां के जुल्म सहते हैं।

मोहब्बत अंजाम ना सोचे
मोहब्बत इजहार करते है
सनम की बेवफाई का
ये गम चुपचाप सहते है।

      मनोज प्रवीण 

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