बरसात's image
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सावन अबकी बार तू मुझको क्या भीगायेगी
जो गमे फिराक में डूबा उसे तू क्या सतायेगी

जिंदगी पतझड़ सी उदास,वीरानियों में खो गई
कोई बहार इसमें रौनक कभी भी ला न पाएगी

मुझे मालूम था बेवफाई ही है उसकी फितरत
पर ये मालूम न था गमे इश्क इस कदर रुलाएगी

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