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चाय और दोस्त

Manmoham sharmaManmoham sharma December 22, 2021
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चलो, यार चलो चाय पीते हैं।
किसके घर, या फिर चलो कहीं खड़े होकर पीते हैं ।
दोस्त भी चाय की तरह होते हैं।
एक भी कम हो तो मजा नहीं आता ।
कोई पत्ती की तरह रंग देता है ।
तो कोई शक्कर की तरह मिठास ।
तो कोई पानी की तरह बेरंग ,
तो किसी से दूध जैसी आस ।।
कोई अदरक सा कड़वाहट लिए, लेकिन गुणकारी होता है ।
तो कोई तुलसी सा आदरणीय ,और उपयोगी होता है ।
कोई इलायची सा, जो कड़वे मुंह का भी स्वाद बदल देता है।
और तो और कई बुराइयों की गंध को भी छुपा देता है ।
मैं भी एक घटक हूं चाय सा, अंग हूं एक दोस्तों के परिवार का।
सच लिखूं ,तो चाय पी कर ,चाय का बहाना लेकर ।
जोड़ दिया है कईयों को बहाना चाय का लेकर ।
अब महक आती है उसकी ,पूरा घर, समाज ,शहर ,देश महकता है ।
मैं नहीं कहता अब तो जमाना कहता है ।।चाय क्या है यह तो मैं जानू या मेरे दोस्त।
कौन क्या है ,कैसा है, कैसे लिखा जाए ।
बस इतना कि चलो फिर एक चाय हो जाए।।

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