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तेरी मेरी 
व्यथा एक सी
ऐ पिंजरे के पंछी
आ तुझको मैं 
आज़ाद कर दूँ 
हर बंधन से 
मुक्त कर दूँ 

जब जी चाहे
उड़ान भरना
उन्मुक्त हवा में 
श्वास लेना
एक दिन मैं भी
सीखूँ जीना
ऐसी दुआ करना।

      मं शर्मा (रज़ा)

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