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सावन की बौछारों से

इन भीगते नज़ारों से

धरती ने पहन लिए

हरियाली परिधानों से

कोई एक बार तो पूछे

मन क्यों अब भी तरसे 


पींग बढ़ाते झूलों से

मेंहदी लगे हाथों से

घर आए मेहमानों से

तीज के पकवानों से

कोई एक बार ये पूछे

सावन सदा क्यों नहीं रहते।


मं शर्मा( रज़ा)

#स्वरचित

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