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छूट जाए हाथ से

वो हाथ कैसा

बदल जाए समय संग

वो सखा कैसा


टूट जाए बिखरके

तो विश्वास कैसा

अपनों बिन गुज़रे

तो जीवन कैसा ।


मं शर्मा (रज़ा)

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