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रात की स्याही से

सुबह के पन्नों पर

पैगाम लिखा है

दिनभर परिश्रम

रात्रि को विश्राम लिखा है


सृष्टि के विधान को

समझोगे क्या

विधाता ने यूँही नहीं

सारा जहान

तेरे नाम लिखा है।

 मं शर्मा( रज़ा)

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