मनभावन's image
Share0 Bookmarks 14 Reads0 Likes

मनभावन उद्गार सी

एक पंखुड़ी गुलाब की

अधरों पर जैसे कोई

मुस्कान हो विराजती


संग जीने मरने के

आजीवन अनुबंध सी

आरती का दीया कोई

मंदिर में उतारती ।



मं शर्मा (रज़ा)

No posts

Comments

No posts

No posts

No posts

No posts