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एक दस्तक के इंतज़ार में

जागता रहा मैं

उसके ख्यालों की खुशबू से

महकता रहा मैं

मिलने की बेकरारी

जाती रही

ख्वाबों की चादर पे

रातभर तारे चुनता रहा मैं।


मं शर्मा (रज़ा)

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