छलना's image
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सरस स्नेहिल सरिता सा

जीवन स्वपन सरीखा था

जाने कैसे मौसम बदले

ख्वाब सलोने ऐसे बिखरे

मानो कल झूठा सपना था

केवल मन का छलना था।


मं शर्मा (रज़ा)


#स्वरचित

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