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आखिरी ख्वाहिश

Manju SharmaManju Sharma October 18, 2022
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जिंदगी की धूप छाँव से

मुरझा कर सूख गई हूँ

बेदम हूँ पर डटी हुई हूँ

मैं वो आखिरी पत्ती हूँ

जो अब तक शाख से

जुड़ी हुई हूँ


मेरी पहचान तुम्हीं से है

खुद से जुदा न करना

यहीं रहना है मुझको

यहीं पर जीना मरना

अपनी पहचान खोकर

नहीं एक पल भी जीना।


मं शर्मा (रज़ा)

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