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प्रेम की सियासत

ManipratapManipratap January 10, 2023
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मैं तुम्हारी सारी कमियों को

दुसाले से ढक लूं

जैसे तुम्हारे ज़ख्मों को

पट्टी लगाकर सहेज लूं

प्यार में प्रेमी यही तो करते हैं

इसमें कहने की क्या बात है।

या तो तुम्हें प्रेम नहीं हुआ

या फिर तुमने जिंदगी महसूस नहीं की

या फिर हो सकता है तुम्हारी चाल ही सियासी हो

क्योंकि दुख, दुख को सहलाता है

कमीं, कमीं को भर देती है लेकिन

तुम्हें ऐतराज़ है मेरी उन कमियों से।

तुम बर्दाश्त नहीं कर सकती मेरी कमियों को,

तुम चाहती हो कि

बर्दाश्त किया जाए तुम्हें

तुम्हारी उजागर कमियों के साथ

तुम सदैव पाना चाहती हो देना नहीं

इसलिए तुम प्रेम में नहीं हो सकती

बस प्रेम की आकांक्षा है तुम्हें

जैसे होती है आकांक्षा किसी वस्तु को पाने की

मेरी होने वाली प्रेयसी

मुझे माफ करना

मैं प्रेम में वस्तु बनकर नहीं रह सकता।

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