औक़ात's image
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#डूबें दरिया मे और क्या करें न करें।

ढूंढे भी नहीं मिल रही हैं कस्तियाँ।।

#माफ़ी तो मांगने पर भी नहीं।

क्यूं न कर लूं कुछ और गलतियां।।

#बचपन जवानी लड़कपन अब कहाँ।

निकला हूँ कहीं दिख जाएँ मस्तियाँ।।

#सुब्ह से दुपहर शाम से रात बंजारा सा।

चलूँ न फ़िर भी चप्पल हैं क्यूं घिसतियाँ।

# बात हिसाब किताब की हमसे है परे।

क़द बढ़ रहा उम्र क्यूं हैं घटतियाँ।।

#औक़ात मे रह गफ़लत से निकल बेदख़ल।

ख़ाक मे मिल गई अच्छे अच्छों की हस्तियाँ।।

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