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तुम अच्छे बहुत हो मगर

शैलेन्द्र रंगाशैलेन्द्र रंगा June 21, 2022
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तुम अच्छे बहुत हो मगर
अच्छाई का क्या।
छुपाके जो रखते हो
उस बुराई का क्या !
मैं लाख मना लूं
दिल को मगर
बीमारी जो बढ़ा दे
उस दवाई का क्या।
मोहब्बत मोहब्बत 
बड़ा करते हो !
बाद में जो करोगे
उस बेवफाई का क्या !
नाम बेशक लिख देना मेरा
कागज़ के टुकड़े पर
दिल मे जो मैंने लिख डाला
उस लिखाई का क्या !
माना कसूर मेरा ही था
मैं करता भी क्या करता
तुम मुस्कुराते रहे देख कर
मेरे दिल की दुहाई का क्या।

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