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कौन रचेगा मेरे गीत ?

शैलेन्द्र रंगाशैलेन्द्र रंगा June 26, 2022
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कौन रचेगा मेरे गीत 

कौन रचेगा मेरे गीत 

कौन रचेगा संगीत 

आज कल की बात नहीं 

सदियों की है रीत। 


सदियों तक बस्ती उजड़ी थी तेरी 

आज महलों का है वासी 

संघर्ष मगर छोड़ो न 

क्यों छाई है उदासी ?

क्यों रोते हो मनमीत। 


क्यों नहीं जीवन में तान 

कहाँ पर है तेरा ध्यान 

राग भी गए रस भी गए 

और न ही मिला सम्मान 

फिर भी जीवन से करके देख प्रीत। 


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