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वो फ़ौजी कहलावें हैं

AnkswritesAnkswrites August 8, 2022
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जिन सभी के लिए हम अपनी जान लुटाते जावें हैं

वहीं लोग हमें बीतें दिनों के समान भुलाते जावें हैं 




मां अपने बेटे को रोकन लई कई तरकीब लगावें हैं

बापू भी पूत नू रोकन लई कईयों बहाने लावें हैं




उस राह पर चल पड़ा हैं एक मां - बाप का बेटा 

जिस राह से कम ही मांओं के बेटे लौट के आवें हैं




दे गया वो अपनों की आंखों में आंसू जाते - जाते

उसकी आंखों में ज़रा सा भी खौफ़ नज़र न आवें हैं




जाते हुए कोई ना निकला विदा करने एक रंग रूट को

मर जानें पर सारा शहर भर का भीड़ उमड़ जावें हैं




हम सभी जवानों का तिरंगे का कफ़न ही मुस्तक़बिल हैं 

बा'द-अज़-मर्ग भी हम अपनी मिट्टी को चूमते जावें हैं 




ज़िंदगी मौत से मिल रही गले फिर भी इन राहों पे हंस के चलें

मौत से डर के छिपने वालें हम को मौत का मतलब समझावें हैं 




धरती का बेटा हूं में पीठ पे नहीं सीने में गोली खाता हूं में

सभी की रक्षा पहला धर्म हैं जिसका वहीं फ़ौजी कहलावें हैं

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