तेरी जुदाई का आलम ही ऐसा था's image
Poetry1 min read

तेरी जुदाई का आलम ही ऐसा था

Kumar UnnayanKumar Unnayan November 1, 2021
Share0 Bookmarks 29 Reads0 Likes

तेरी जुदाई का आलम ही ऐसा था

हज़ारों के सय मे भी मैं अकेला था


और यू तो फ़क़त रौशनी थी मेरे घर में 

मगर कोना-कोना घनघोर अँधेरा था 


आशिया उज़र गया दिल का जब दोनों तरफ़ 

फ़िर इस जहां में क्या हमारा, 

और क्या तुम्हारा था.... 

No posts

Comments

No posts

No posts

No posts

No posts