Maa's image
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माँ, तुम अनंत स्रोत हो ममता का 
तुम अदम्य कोष हो क्षमता का 
तुम वात्सल्य का निर्झर हो 
तुम ईश्वर से भी ऊपर हो 
जीवन मेरा सिंचित तुमसे 
तुम पृथक नहीं किंचित मुझसे 
तुम मेरे रग रग में रहती हो 
धारा अमृत की बन बहती हो 
मैं तो प्रतिबिम्ब तुम्हारी हूँ 
तुम्हारी बगिया की क्यारी हूँ 
अब मैं भी इक महतारी हूँ 
जननी तुम हो, उद्गम तुम हो 
माँ, मेरा तो जीवन तुम हो 

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