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शाम, सिगरेट, मरघट

Kiran K.Kiran K. October 19, 2021
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मेरे शाने पे सर रख के
रो रही हैं ये उदास शाम
मेरी नज़्मों की शिकस्ता तहरीरें
मलाल आँखों से
देख रही हैं मेरी जानिब..
तफ़क्कुर ज़हन में कोई
अंगड़ाई लेने लगा है..
और उसमे ये सुलगती
सिगरेट का धुंआ..उफ़्फ़ 
ख्वाहिशों का मरघट
बन गया मेरा कमरा..!!

-किरण के. ✍

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