मीरा के आर्त स्वर में लिपटी's image
Love PoetryPoetry1 min read

मीरा के आर्त स्वर में लिपटी

Kiran K.Kiran K. October 28, 2021
Share0 Bookmarks 53 Reads1 Likes

मीरा के आर्त स्वर में

लिपटी हुई ये साँझ

और आसमाँ में बिखरे हुए

शाम के ये अधूरे रंग

सामने मेज़ पे पड़ी

डायरी के पन्ने परलिखी हुईं

आधी अधूरी पंक्तियाँ

एक हाथ में आधी बची हुई

कॉफी का मग

तो दूसरे हाथ में

आधी अधूरी जली हुई सिगरेट

और राख हुए रिश्ते के

धड़कन में बचे हुए कुछ 

यादों के अधूरे से लम्हें

समझ में नहीं आ रहा हैं

ये धुँआ आखिर..

कहा से निकल रहा ?!


किरण के.

No posts

Comments

No posts

No posts

No posts

No posts