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सीने के अंदर

khatuniajotsnakhatuniajotsna May 12, 2022
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कविता - सीने के अंदर
 कवि - जोत्सना जरीक

 .
 मेरा प्यार जब ऐ
 खोड़ा (अल्लाह) की प्रेम बरसाई
 मे किया करु
 दिल घबराये
 प्रेम बरसाय
 .
 सीने में आंसुओं का फव्वारा
 फाल्गु नदी की तरह
 ऊपर सिर्फ रेत और रेत है
 पानी पड़ा है...
 .
 प्यारी सी चाँद की रात
 जब पंछी सो गए
 एक या दो सितारे गिरते हैं
 ध्वनि सुनना
 आमने सामने खड़ा है
 दिन पीछे छूट गए


 .
N.B:-
 * फाल्गु सिर्फ भारतीय नदी का एक  
    पौराणिक नाम है।
    इस नदी पर सिर्फ रेत है।
    यदि आप थोड़ी सी रेत खोदते हैं,
    पानी मिलेगा।  ]




 

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