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तसल्ली से तुम्हारा कुछ नहीं होगा।

Ketan ApteKetan Apte February 4, 2022
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ज़ीनत से तुम अच्छी लगोगी, 

रास्ता कितना बे ज़ार है। 

मैं इस्बात ढूंढने कहाँ जाऊ, 

मुझे कौन सा पैमान देना है।


ताबिश अलमारी मैं घुटती रहेगी,

आख़िर उसका बद अंजाम होगा।

तोहफ़ा तो सभी लेकर आएंगे महफिल में, 

तसल्ली से तुम्हारा कुछ नहीं होगा। 



- केतन आपटे

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