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[किसलिये राह में करते श्याम ठठोली - राधेश्याम कथावाचक]

KavishalaKavishala March 17, 2022
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किसलिये राह में करते श्याम ठठोली।

बस माफ़ करो रहने दो, होली, होली!

तुम निपट निठुर, नंदलाल चाल करते हो।

पिचकारि मार, फ़िलहाल लाल करते हो॥

दिखला जमाल बेहाल हाल करते हो।

चट चूम गाल, तत्काल जाल करते हो॥

चूड़ियाँ चटका कर बोरी चुनरी, चोली।

बस माफ़ करो रहने दो, होली, होली॥

कुमकुमे मार क्यूँ बेकरार करते हो?

अंबर सुढार के तार-तार करते हो॥

गल बाँह डार हर बार रार करते हो।

अंचल उघार क्यूँ यार ख़्वार करते हो॥

हँस-हँस निज बस कर बोलत रसभरी बोली।

बस माफ़ करो रहने दो, होली, होली॥

गा के कबीर क्यूँ चित्त अधीर करते हो।

चश्मों के तीर से दिल असीर करते हो॥

कंपित शरीर तुम नहीं पीर करते हो।

ढरकाय नीर, फेंका अबीर करते हो॥

घूँघट को उलट, चटपट करो बातें भोली।

बस माफ़ करो रहने दो, होली, होली॥

पटका झटका कर क्यूँ मटका करते हो?

चलते-फिरते-तकते, अटका करते हो॥

झट झूम-झाम दिल में खटका करते हो।

झंझट कर नटखट दधि गटका करते हो॥

होली की, ’राधेश्याम’ कथन अनमोली।

बस माफ़ करो रहने दो, होली, होली॥ 





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