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ॐ रामदूताय विद्महे कपिराजाय धीमहि

Kavishala SanskritKavishala Sanskrit May 10, 2022
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ॐ रामदूताय विद्महे कपिराजाय धीमहि।

तन्नो हनुमान् प्रचोदयात्॥

ॐ हम भगवान राम के दूत और वानरों में सर्वश्रेष्ठ से प्रार्थना करते हैं। हनुमान हमें जागृत करें।


बुद्धिर्बलं यशो धैर्यं निर्भयत्वमरोगता।

अजाड्यं वाक्पटुत्वं च हनुमत्स्मरणाद्भवेत्॥

बुद्धि, बल, यश, धैर्य, निर्भयता, स्वास्थ्य, चेतना, और वाक्पटुता, ये सब श्री हनुमान् जी का स्मरण करने से प्राप्त हों।


शान्तः प्रयासात्पूर्वं विषमादनन्तरं च।

शांत​ – प्रयास के पूर्व भी, तुफ़ान के उपरांत भी।


ॐ आञ्जनेयाय विद्महे वायुपुत्राय धीमहि ।

तन्नो हनुमत् प्रचोदयात् ॥

ॐ, हम अंजनीकुमार और वायुपुत्र पर ध्यान करते हैं। भगवान हनुमान हमें जागरित करें॥


मनोजवं मारुततुल्यवेगं जितेन्द्रियं बुद्धिमतां वरिष्ठं।

वातात्मजं वानरयूथमुख्यं श्रीरामदूतं शरणं प्रपद्ये॥

हे मनोहर, वायुवेग से चलने वाले, इन्द्रियों को वश में करने वाले, बुद्धिमानो में सर्वश्रेष्ठ। हे वायु पुत्र, हे वानर सेनापति, श्री रामदूत हम सभी आपके शरणागत है॥


तथाप्येको रामः सकलमवधीद्राक्षसकुलं

क्रियासिद्धिः सत्त्वे भवति महतां नोपकरणे॥

आपदाओं के विरुद्ध श्री राम ने सभी राक्षसों का संहार किया। व्यक्ति की सफलता अपने क्षमताओं पर निर्भर करती है।




Source – Hanuman Gayatri Mantra.

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