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कैसे बना तिरंगा राष्ट्रीय ध्वज?

Kavishala LabsKavishala Labs January 26, 2021
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इसे 15 अगस्‍त 1947 और 26 जनवरी 1950 के बीच भारत के राष्‍ट्रीय ध्‍वज के रूप में अपनाया गया था। बता दें कि तिरंगे का डिजाइन आंध्रप्रदेश के पिंगली वेंकय्या ने बनाया था। यानी पिंकली वेंकय्या की वजह से ही भारत को मिला तिरंगा!

सबसे पहले बना था यह ध्वज

सबसे पहले लाल, पीले और हरे रंग की पट्टियों पर बने झंडे को 7 अगस्त 1906 को पारसी बागान चौक (ग्रीन पार्क) कोलकाता में फहराया गया था। इसके बाद इसमें कई बदलाव हुए।

फिर बना यह दूसरा ध्वज

साल 1907 में पेरिस में मैडम कामा और उनके साथ कुछ क्रांतिकारियों ने दूसरा ध्वज फहराया था। यह भी पहले ध्वज की तरह ही था। इसमें सबसे ऊपर बनी पट्टी पर सात तारे सप्‍तऋषि को दर्शाते थे जबकि इसमें एक कमल भी था।

इसके बाद बना यह तीसरा ध्वज

डॉ एनी बीसेंट व लोकमान्य तिलक ने घरेलू शासन आंदोलन ( होम रूल मूवमेंट) के दौरान यह तीसरा ध्वज फहराया था।

इस ध्‍वज में 5 लाल और 4 हरी क्षैतिज पट्टियां एक के बाद एक और सप्‍तऋषि के स्वरूप में इस पर बने सात सितारे थे। बाईं ओर ऊपरी किनारे पर यूनियन जैक था और दाईं तरफ ऊपरी किनारे पर सफेद अर्धचंद्र और सितारा भी था।

कांग्रेस कमेटी के सत्र में फहराया था चौथा ध्वज

चौथा ध्वज अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी के सत्र के दौरान 1921 में बेजवाड़ा में फहराया गया था। यह दो रंगों लाल और हरे से बना था जो हिंदू और मुस्लिम दोनों समुदायों को दर्शाता था। गांधी जी ने यह सुझाव दिया था कि भारत के बाकी का प्रतिनिधित्व करने के लिए इसमें एक सफेद पट्टी और एक चलता हुआ चरखा होना चाहिए।

यहां फहराया गया था पांचवा ध्वज

पांचवा ध्वज साल 1931 में फहराया गया। यह ध्‍वज भारतीय राष्ट्रीय सेना का संग्राम चिन्ह भी था। वहीं हम पहले ही आपको बता चुके हैं कि 22 जुलाई 1947 को आया केसरिया, सफेद और हरा रंग का झंडा अपनाया। जिसके बीचों-बीच अशोक चक्र भी बना है जिसमें 24 तिल्लियां होती हैं। तिरंगे को इंडियन नेशनल कांग्रेस ने भारत के स्वतंत्र होने से कुछ समय पहले ही अपना लिया था।

स्वराज झंडे पर आधारित तिरंगे झंडे के नियम-कानून फ्लैग कोड ऑफ इंडिया द्वारा बनाए गए। जिसमें निर्धारित था कि झंडे का प्रयोग केवल स्वतंत्रता दिवस और गणतंत्र दिवस के अवसर पर ही किया जाएगा।

इसके बाद 2002 में नवीन जिंदल ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका लगाई। जिसके पक्ष में सुप्रीम कोर्ट ने भारत सरकार को निर्देश दिए कि अन्य दिनों में भी झंडे का प्रयोग नियंत्रित रूप में हो सकता है। इसके बाद 2005 में जो सुधार हुआ, उसके अंतर्गत कुछ परिधानों में भी तिरंगे झंडे का प्रयोग किया जा सकता है।

भारतीय ध्वज संहिता के प्रावधान के अनुरूप नागरिकों एवं बच्चों से शासन की अपील है कि वे स्वतंत्रता दिवस पर केवल कागज के बने राष्ट्रीय ध्वज का ही उपयोग करें।

साथ ही कागज के झंडों को समारोह संपन्न होने के बाद न विकृत किया जाए और न ही जमीन पर फेंका जाए। ऐसे झंडों का निपटान उनकी मर्यादा के अनुरूप ही किया जाना चाहिए।

आमजन से आग्रह है कि वे स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर प्लास्टिक से बने झंडों का उपयोग बिलकुल ही न करें, क्योंकि प्लास्टिक से बने झंडे लंबे समय तक नष्ट नहीं होते हैं और जैविक रूप से अपघट्य न होने के कारण ये वातावरण के लिए हानिकारक होते हैं।

साथ ही इधर-उधर पड़े रहने से राष्ट्रीय ध्वज की गरिमा को आघात पहुंचता है।









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