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एकनाथ ईश्वरन : ध्यान के आठ केंद्र

Kavishala DailyKavishala Daily October 26, 2021
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मन में चुपचाप जपने पर कोई मंत्र सबसे अधिक प्रभावी होता है !

केरल, भारत में ईश्वरण जी का जन्म हुआ। यह भारतीय विश्वविद्यालय में अंग्रेजी साहित्य के प्रोफेसर थे। 1959 में वह डिग्री के लिए अमेरिका में शिक्षा के लिए गए। 40 वर्षों तक ध्यान व आध्यात्मिक जीवन पर व्याख्यान दिए। 1961 में उन्होंने ब्लू माउंटेंस सेंटर ऑफ मैडिटेशन की स्थापना की, जो उनकी लिखी किताबें, वीडियो, ऑडियो, बातचीत, प्रकाशित करता और ऑनलाइन कार्यक्रम प्रदान करता है।

उन्होंने ध्यान के मार्ग में ज्ञान और पूरे दिन खुद को संचालित करने के तरीके के बीच एक गहरा संबंध पाया।

उन्होंने स्वयं के आध्यात्मिक अनुभव के आधार पर ध्यान के मार्ग को एक सरल और प्रभावी बनाने के लिए, "आठ सूत्र का कार्यक्रम " बनाया। जिसे सभी उम्र के हजारों लोग पूरी दुनिया में इस कार्यक्रम का अनुसरण करते हैं।

उन आठ सूत्रों का सारांश आपके सामने निम्नलिखित प्रस्तुत है :-

1. ध्यान : ज्ञान मार्ग का मूल ध्यान से शुरू होता है। ईश्वरण हमें एक या आधे घंटे के लिए ही ध्यान करने को कहते हैं, ना कि समय बढ़ाते रहने को। ध्यान के लिए कमरा, या स्थान निश्चित करो। एक प्रार्थना से ध्यान की शुरुआत करो जो कि इस प्रकार है —

" हे प्रभु, मुझे अपनी शांति का साधन बना।

जहां नफरत है, मुझे वहां प्यार फैलाने दो।

जहां चोट है, क्षमा करें।

जहां संदेह है, वहां विश्वास है।

जहां निराशा है, वहा आशा है।

जहां अंधेरा है, वही उजाला है।

जहां दुख है, वहा सुख हैं।

है दिव्य गुरु! यह अनुदान दे कि,

मैं इतना अधिक ना चाहूं कि मैं सांत्वना दू।

की, समझा जाऊं कि समझा जाऊं।

प्रेम के रूप में, प्यार किया जाऊ।

क्योंकि देने से ही हम प्यार पाते हैं।

क्षमा करने से ही, हमें क्षमा किया जाता है।

यह स्वयं को मरने में है कि,

हम अनंत जीवन के लिए पैदा है।

2. मंत्रम दोहराव : ईश्वरण जी कहते हैं कि, एक मंत्र एक आध्यात्मिक सूत्र है जो किसी के धर्म से आता है या आपके अध्यात्मिक गुरु से मिलता है। हम कुछ भी कार्य करें तो अपने दिमाग या मन में अपने मंत्रों को जो आपने चुना है उसे चुपचाप दोहराते रहे।

3. धीमा : आलसी हुए बिना या कहे बिना आलस के बस अपने दिन की शुरुआत जल्दी करें। कम काम करें परंतु, करें। यदि आप व्यथित या तेज होने लगते हैं तो धीमा काम करने के लिए अपने मंत्र को दोहराएं। बेकार की चीजों पर समय खर्च ना करें। जो जरूरी है, उसी मूल बातों पर वापस आए।

4. एक बिंदु ध्यान : आप जो भी काम जिस भी समय कर रहे हैं, बस उस समय उसी काम पर अपना पूरा ध्यान केंद्रित करें। एक साथ कई काम करने को भूल जाओ। जो कुछ भी आप कर रहे हैं, उसमें अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करें। अपने ध्यान को एक बिंदु की तरह केंद्रित रखें।

5. ट्रेनिंग सेंस : इसमें किसी भी तरह का सेवन हो उसके भेदभाव के बारे में बताया गया है।

ईश्वरण हमें सबसे बुनियादी स्तर पर, खाने के लिए निर्देशित निर्देश देते हैं। की हमारे शरीर को क्या चाहिए, ना कि जो अच्छी स्वाद की चीजें हैं, जो हमें भी उसी तरह का निर्देश देता है जिसे हम पढ़ते, देखते हैं। हमें अपने मन से केवल वही उपभोग करना चाहिए, जो हमारी आत्मा के लिए अच्छा हो

6. निस्वार्थता : इसकी शुरुआत आप अपने उन लोगों से करें जिन्हें आप प्यार करते हैं। आप जिन्हें प्यार करते हैं, आप बस उनकी जरूरतों पर ध्यान केंद्रित करते हैं और उन्हें अपने से आगे रखते हैं। जबकि, आपको अपने अहंकार को खत्म करके उनकी आत्मा से खुद को जोड़ना चाहिए।

7. रहस्यवाद में पढ़ना : इसमें यह कहा गया है कि, दुनिया के महान ऋषि-मुनियों के ग्रंथों और लेखों का पाठ पढ़ने में प्रतिदिन आधा घंटा जरूर बिताए। खासकर, रात को सोने से पहले, अगर कुछ अच्छा लेख आप पढ़ते हैं तो उन नकारात्मक और नीच आत्म छवियों को दूर करने व उनसे मुकाबला करने के लिए काम करता है।

8. अध्यात्मिक संघ : अंत में ईश्वरण हमें ऐसे लोगों और कामों से जुड़ने का निर्देश देते हैं, जो सिर्फ आध्यात्मिक विकास में लगे हुए हैं। सभी आध्यात्मिक संघों, लोगों के साथ जुड़कर काम करके, एक सामाजिक कार्य में जुड़ कर हिस्सा लेकर, दूसरे लोगों का लाभान्वित करें। अध्यात्मिक की गहराई की ओर बढ़े।

ईश्वरण जी ने कहा है कि इन आठ केंद्र से जुड़ने पर यह हमारे जीवन को सकारात्मक रूप में बदलते हैं।

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