अत्तूर रवि वर्मा - अपने जमाने की एक अनूठी काव्य वाणी's image
Article4 min read

अत्तूर रवि वर्मा - अपने जमाने की एक अनूठी काव्य वाणी

Kavishala DailyKavishala Daily October 27, 2021
Share0 Bookmarks 35 Reads0 Likes

आधुनिक मलयालम काव्य जगत के श्रेष्ठ कवियों में विद्यमान कवि और अनुवादक अत्तूर रवि वर्मा का जन्म आज के ही दिन 1930 को त्रिशूर जिले के अत्तूर गांव में हुआ था। मालाबार क्रिश्चियन कॉलेज से पढ़ाई के बाद उन्होंने तिरुवनंतपुरम के यूनिवर्सिटी कॉलेज से मलयालम भाषा में स्नातक की उपाधि प्राप्त की। वहीं वर्मा 1986 में प्रोफेसर के पद से सेवानिवृत हुए थे। उन्होंने मलयालम साहित्य में अपना विशेष योगदान दिया है। उनकी कविताओं के लिए उन्हें केन्द्र के साहित्य अकादमी पुरस्कार और केरल साहित्य अकादमी पुरस्कार से सम्मानित किया जा चूका है। इसके अतिरिक्त उन्हें अनुवाद के लिए केरल साहित्य अकादमी पुरस्कार समेत कई सम्मानों से सम्मान प्राप्त है। 

केरल सरकार ने उन्हें 2012 में अपने सर्वोच्च साहित्यिक पुरस्कार, एज़ुथाचन पुरस्कार से सम्मानित किया और केरल साहित्य अकादमी ने उन्हें 2017 में अपने विशिष्ट साथी के रूप में शामिल किया।


जब वामपंथी के चलते कॉलेज से किया गया निष्कासित :

बात करें वर्मा जी के शिक्षा की तो उन्होंने अपने पूर्व-विश्वविद्यालय पाठ्यक्रम के लिए ज़मोरिन के गुरुवायुरप्पन कॉलेज, कालीकट में प्रवेश लिया जहाँ वामपंथी राजनीति में शामिल होने के कारण उन्हें कॉलेज से निष्कासित कर दिया गया। बाद में, उन्होंने यूनिवर्सिटी कॉलेज, त्रिवेंद्रम से सम्मान के साथ मलयालम में स्नातक होने से पहले मालाबार क्रिश्चियन कॉलेज में पढ़ाई जारी रखी। इसके बाद, उन्होंने प्रेसीडेंसी कॉलेज, मद्रास मलयालम विभाग में एक संकाय के रूप में प्रवेश लिया, जहां उन्हें प्रसिद्ध लेखक एम गोविंदन के संपर्क में रहने का अवसर मिला, जिससे उन्हें तमिल भाषा के अध्ययन में मदद मिली। जहाँ से उन्होंने मद्रास में एक शिक्षक के रूप में अध्यापन कार्य शुरू किया परन्तु कुछ समय बाद ही वे श्री नीलकांत सरकारी संस्कृत कॉलेज पट्टांबी में काम करने के लिए केरल वापिस लौट आए, जहां प्रमुख राजनेता पिनाराई विजयन और ए के बालन उनके छात्र थे।


मलयालम साहित्य में आधुनिकता का उठाया बीड़ा :

मलयालम साहित्य में आधुनिकता का बीड़ा उठाने वाले रवि वेर्मा की कविताओं ने खुद को किसी भी सीमा में नहीं बाँधा मुक्त छंद का उपयोग करते हुए अपनी कविताओं को अलग अंदाज़ दिया। युवा लेखकों को प्रत्साहित करने का कार्य किया। उनकी कविताओं में तीन संकलनों के तहत संकलित कई कविताएँ हैं, तमिल के चार उपन्यासों का अनुवाद जिनमे सुंदर रामास्वामी के दो और राजति सलमा का एक है इसके साथ तमिल कविता के अनुवाद की दो पुस्तकें और युवा लेखकों की कविताओं का एक संपादित कार्य शामिल है।मलयालम केलिन्डर पर भक्ति कविताओं का अनुवाद करने वाले भी रवि वर्मा ही थे। 

अत्तूर रवि वर्मा के कार्यो और जीवन पर आधारित एक फिल्म भी बनाई जा चुकी का जिसका कुशल निर्देश मारुविली अनवर अली द्वारा किया गया है। 


No posts

Comments

No posts

No posts

No posts

No posts