आहत's image
Share0 Bookmarks 23 Reads1 Likes
कैद की साँस मे
तन पे छायों का डेरा
खुले आसमान मे
यूँ अचानक बादलों का फेरा
नरम नरम आहटें
कहीं आदत ना कर दे
सम्भल के पाँव रखना
कहीं आहत ना कर दें

रौशनी के गुबार मे चाँदनी भर रही
टिमटिमातें तारों की लड़ी लग रही
यूँ अचानक किधर से हवा आ गयी
बूँद बादल भरे रात झिलमिल हो गयी

सम्भल के पाँव रखना
कहीं आहत ना कर दें....

रूक जाओ जरा !
देख लो एक नजर
रास्ते से अपने मंजिल तक का सफर
कही काटों सा फूल तो नही पथ पर !

सम्भल के पाँव रखना
कहीं आहत ना कर दें.....।।

No posts

Comments

No posts

No posts

No posts

No posts