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"मिलिए जरा BaAP से मेरे"

kavi_divyansh_ divyakavi_divyansh_ divya September 9, 2022
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एक रोज जा रहा था मैं तो अपनी कार में,

एक सुंदर कन्या मिल गई मुझको बाजार में!

मैंने कहा उसको वो मुझे बेहद पसंद है,

वो बोली मेरे दिल के सब दरवाजे बंद है!

मैंने कहा हे प्रिये मोहब्बत है आपसे!

वो बोली पहले मिलिए जरा मेरे बाप से!

ये सुनके जैसे मेरी तो तबीयत बिगड़ गई,

हालत को देखकर मेरी वो तो उखड़ गई!

मैनें कहा उसे सुनिए जरा बात को मेरी,

वो बोली मैं समझ गई औकात को तेरी!

अब और ना तुम मेरे यूँ भेजे को खाईये!

खिसकीये और मुझको यहां से भगते पाईये!!

~© दिव्यांश “दिव्य”

#स्वरचित

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