वो गिरे-पड़े पर बढ़े चले's image
Poetry1 min read

वो गिरे-पड़े पर बढ़े चले

Kavi Agam MishraKavi Agam Mishra March 31, 2022
Share0 Bookmarks 0 Reads0 Likes
दौड़ धूप साथी उसके,
जो तूफानों से लड़े अकेले।
कभी नहीं थके-रुके,
वो गिरे-पड़े पर बढ़े चले।

अल्पायु में बाल पके,
जब चिंता में चेतन पले।
अंकुर नहीं कभी झुके,
तब बंजर भूमि में सुमन खिले।

No posts

Comments

No posts

No posts

No posts

No posts