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Romantic PoetryPoetry1 min read

हमें अच्छा नहीं लगता

kaushal kumar joshikaushal kumar joshi August 3, 2022
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तुम ना यूँ रूठो, हमें अच्छा नहीं लगता

दूर ना बैठो, हमें अच्छा नहीं लगता

तुमपे ये ख़ामोशियाँ, बिलकुल नहीं जँचती

तुम ना कुछ बोलो, हमें अच्छा नहीं लगता



जाँ तबस्सुम खेलती थी, अब वहाँ तल्ख़ी

अब ज़रा हँस दो, हमें अच्छा नहीं लगता



हमको सारी खलकतें, चाहे नहीं समझे

तुम भी ना समझो, हमें अच्छा नहीं लगता 



तुमको कितनी चाहतें हैं, क्या कभी पूछा?

तुम भी मत पूछो, हमें अच्छा नहीं लगता


बेदिली अच्छी नहीं, उकता गया “कौशल”

ज़िद सनम छोड़ो, हमें अच्छा नहीं लगता


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