पर्यावरण और हम's image
Poetry1 min read

पर्यावरण और हम

Kapileshwar singhKapileshwar singh June 5, 2022
Share0 Bookmarks 33 Reads0 Likes
पर्यावरण और हम
शरीर और रूह जितने है
जो तवज्जो न दी इसे 
हम ज्यादादेर न टिकने है
रसोई गैस सस्ती जरूर होनी है
क्युंकी भड़ती गरमी में पराठे 
खुली धूप में ही सिकने है
सोने के गहने अभी ख़ूब सस्ते है
वो दिन दूर नहीं 
जब पेड़ भी गहनों से मेहंगे बिकने है
पर्यावरण और हम
शरीर और रूह जितने है
जो तवज्जो न दी इसे 
हम ज्यादादेर न टिकने है
जो तवज्जो न दी इसे 
हम ज्यादादेर न टिकने है।

No posts

Comments

No posts

No posts

No posts

No posts