जो बन पाया वो तुल गया नसीबो से...'s image
Peace PoetryPoetry1 min read

जो बन पाया वो तुल गया नसीबो से...

Kapileshwar singhKapileshwar singh May 1, 2022
Share0 Bookmarks 47 Reads0 Likes

जो बन पाया वो तुल गया नसीबो से

जो बन न पाया वो रह गया उम्मीदो का

मैं एक इंसानी सिक्का खनकता रहा कुछ बन पाने के बाजारो में

मन की सब इच्छाओ का इन्ही बाजारो में सरेआम कत्लेआम हुआ

मै न चाहकर भी बना एक मोहरा जो बना कातिल खुद की इच्छाओ का

जिस्का दर्ज भी न जुर्म और ना ही कही पर नाम हुआ

मै इस भड़ती भीड़ में घुन जितना ही आम हुआ

जो बन पाया वो तुल गया नसीबो से

जो बन न पाया वो रह गया उम्मीदो का

मैं एक इंसानी सिक्का खनकता रहा कुछ बन पाने के बाजारो में

मन की सब इच्छाओ का इन्ही बाजारो में सरेआम कत्लेआम हुआ

मन की सब इच्छाओ का इन्ही बाजारो में सरेआम कत्लेआम हुआ।




No posts

Comments

No posts

No posts

No posts

No posts