इश्क से भढ़कर...'s image
Love PoetryPoetry1 min read

इश्क से भढ़कर...

Kapileshwar singhKapileshwar singh April 1, 2022
Share0 Bookmarks 53 Reads0 Likes

इश्क से भढ़कर

न मैंने देखा न मैं देख पाया

क्योंकि यही तो था

जो हुआ बिन जात के और

न ही जिसके धर्म बीच में आया।

No posts

Comments

No posts

No posts

No posts

No posts