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( क़ितआ ) - ग़ैर हूँ मैं

Kamini MohanKamini Mohan May 3, 2022
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( क़ितआ ) - ग़ैर हूँ मैं

ग़ैर हूँ मैं सबके  लिए  पर सब है मेरे  अपने
मोम-सा ये दिल देखता है हसरतों के सपने
बेगानापन  देखा  न   किसी  में  कभी  मैंने
प्रेम  ही  देखता  हूँ   बस   प्रेम  किया  मैंने।
- © कामिनी मोहन पाण्डेय।

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