लुटा लुटाकर सब उजाला - कामिनी मोहन।'s image
Poetry1 min read

लुटा लुटाकर सब उजाला - कामिनी मोहन।

Kamini MohanKamini Mohan May 6, 2022
Share0 Bookmarks 23 Reads1 Likes
लुटा लुटाकर सब उजाला
प्रेम अँधेरे में भी झाँकता है।
कोमलता हो या कि कठोरता
सबको घेरे में घेर लेना चाहता है।

यह खुली भागती सड़क का
दरवाज़ा बंद कर देना चाहता है।
मुलाक़ातों में जज़्बातों की
उँगलियों को छू लेना चाहता है।

दिन हो या कि रात
सहेज कर देह को
आँखों के सामने रख देना चाहता है।
बस एक हृदय की निधि में ही
डूब जाना चाहता है।
- © कामिनी मोहन पाण्डेय।

No posts

Comments

No posts

No posts

No posts

No posts