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लोग हम जैसे कलमकारों को कब पढ़ा करते हैं

वरना हम भी तो गज़ब गीत गज़ल कहा करते है 


उनकी आंखों के सहराओ में डूबकर ही हम तो

मुकम्मल सी एक गज़ल हर रोज गढ़ा करते है


यायावरी घुमक्कड़पन और गांव चौपालों से

जाने क्या क्या सभी बुजुर्गों से सिखा करते है


..कमल पुंडीर ऐड़वोकेट

सुप्रीम कोर्ट नई दिल्ली

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