माँ के पास।'s image
Share0 Bookmarks 83 Reads1 Likes
बरसों पहले कोशिश की थी कविता लिखने की
पर तेरे रहते नहीं जरूरत अल्फ़ाज़ों को ढूँढने की। 

कभी समझना उसकी बातों से, बातों में जीवन कहानी हैं

बहुत कुछ मिलने की आस, इस आस में बहुत सा खास
बस कुछ देर बैंठ कर तो देखो माँ के पास। 

Pragati Juneja

No posts

Comments

No posts

No posts

No posts

No posts