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Nepali PoetryArticle1 min read

नेता जी को सादर नमन

Jigyasa SinghJigyasa Singh January 23, 2022
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सच कहूं !! बहुत तुम याद आए ।

ऊंची ऊंची मीनारों पे उड़ते जो तिरंगे को देखा
मन में कुछ भाव उभर आए ।।

मां बाबा मुझे बताते थे, वो बड़ा सिपाही बांका था
उसकी इक इक चालों से गोरे, हरदम रहते घबराए ।।

ऊंचा मस्तक, दरम्याना सा, वो फौजी था टोपी वाला
बादल में बिजली ज्यों कड़के, आंखों में उसके उतर आए ।।

आजाद हिंद की सेना का, नारा वो आजादी वाला
सब भूल गए प्यारे सैनिक, हम भूल नहीं अब तक पाए ।।

सब कहते तुम पैदल चल के, हर गांव की यात्रा करते थे
ऐसे सेनानी कहां गए ? नैनों में अश्रु उतर आए ।।

एक दीप जला हाथों में रख, अंबर के नीचे खड़ी हुई
अंबर से उतरा एक तारा, दीपक की लौ में समा जाए ।।

में समझ गई तुम ज्योति बने, इस राष्ट्र को मार्ग दिखाते हो
आलोक तुम्हारी कीर्ति, धरा पर चारों ओर नज़र आए ।।

**जिज्ञासा सिंह**
स्वरचित एवं मौलिक

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