क्या कहा जाए !'s image
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न तुम्हे चांद ही कहूं
न तुम्हे सांझ ही कहूं
न हो तुम कोई भोर
न ही कोई ज्योत।

तुम्हे बांध के छंद में
पिरो कर तरानो में 
डालकर पैरों में
उपमाओं की जंजीर 
मुझे नहीं रखना।

क्यों बनाकर कल्पना तुम्हे
हवा में घोलू? 
क्यों न रहने दू 
तुम्हे वहीं 
जो तुम हो सच में
'एक-स्त्री'

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