उठा हाथ....'s image
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उठा हाथ नभ की ओर,

समूचा ब्रह्मांड समेट लूंगा,

यायावरी! इस जीवन को,

क्षणभर यही थाम दूंगा,


अतरंगी इस दुनिया में,

ख्वाब मेरे सतरंगी हैं,

इक्का-दुक्का सा दबा दु:ख कहीं,

ह्रदय से इच्छाएं उचट चुकी हैं,


उत्कंठा प्रबल उत्साह का उत्सव बनाने को,

उन्नति के प्रासादों पर एकाधिकार जमाने को,

ओझल है खुशियां अभी,

ओहदे की प्रतीक्षा में,

ऊहापोह! चल रही है,

उलझन उलझाती, ऊसर से हृदय में.....

~इन्द्राज योगी


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