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सृष्टि और संहार शिव

Himkar ShyamHimkar Shyam March 1, 2022
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निराकार-साकार शिव, शिव में नहीं विकार।
सृष्टि और संहार शिव, शिव ही पालनहार।।

बाघ  छाल  का  वस्त्र है,  ग्रीवा  में मुंडमाल।
बसे हलाहल कंठ में, सोम सुशोभित भाल।।

डमरू  शिव  के  हाथ में,  बहे  शीश  से गंग।
अंगराग  शव भस्म है,   लिपटा गले भुजंग।।

बाम  भाग   में   पार्वती,   बैठे  नन्दी   द्वार।
अविनाशी  नटराज  हैं,   नश्वर सब संसार।।

शिव  देवों बके देव हैं,   शिव  सर्वशक्तिमान।
नीति  धर्म  के  मूल हैं,  करते जग कल्याण।।

ॐ  कार  के  जाप  से,   मिटे  कलुष  अज्ञान।
बम बम भोले बोलिए, धरिए शिव का ध्यान।।

■ हिमकर श्याम

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