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रेलगाड़ी के 

अनजाने सफ़र में 

दोस्ती शायद 

अब नहीं हुआ करती


सोशल मीडिया पे 

स्वाइप्स होते

पहचान शायद

अब नहीं हुआ करती


गैजेट्स की

मसरूफ़ियत की

नुमायिश तो होती

अजनबियों की

नज़र मिलने पर 

मुस्कान शायद

अब नहीं हुआ करती


नज़ाकत से

हिंग्लिश में

फ़ास्टफ़ूड 

ऑर्डर होते

तेल सनी 

टिफ़िन पन्नी

पूड़ी आलू अचार 

साँझी ख़ुराक शायद

अब नहीं हुआ करती


सॉकेट पे 

चार्जर पे

“दैट्स माइन” के

अक्खड़ अल्फ़ाज़ इंग्लिश में

सीट के चुनाव पे

चुनाव के सुझाव पे

बहस बात शायद

अब नहीं हुआ करती


लोकेशन सेल्फ़ी अप्डेट होते

फ़ोटो फ़िल्टर सेट होते

कहाँ से ? कहाँ को?

ऐसी कोई बात शायद

अब नहीं हुआ करती


नस्ल तब की

रही नहीं

नस्ल ऐसी शायद

अब नहीं हुआ करती


पैदायिश हैं

कुछ ख़ास दशक की

दोनों रँग देख रही

ऐसी ख़ुशक़िस्मती शायद

अब नहीं हुआ करती


*~हिमाँशु~*

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