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जाने किस वेग से चलती है, यह हर रोज बदलती है।


धुंधली हो चली हैं अब बचपन की चंचल स्मृतियां,

पर बच्चे सी शरारतें दिल में आज भी मचलती हैं,


जाने किस वेग से चलती है, यह हर रोज बदलती है।


यौवन का वो दौर, कुछ करने का जुनून, आगे बढ़ने की होङ,

उस लड़की के इंतजार की बातें, कल परसों की लगती हैं,


जाने किस वेग से चलती है, यह हर रोज बदलती है।


नए रिश्ते, नए आयाम, उम्मीदों के साये में पनपते ख्वाब बेलगाम,

रोकना चाहूं मगर नहीं रुकती, हाथों से रेत सी फिसलती है,


जाने किस वेग से चलती है, यह हर रोज बदलती है।


हौंसले, समझौते, संघर्ष, उत्कर्ष, वेदना की टीस, जीत का हर्ष,

आभासों और अहसासों के गठबंधन में रोज शाम सी ढलती है,


जाने किस वेग से चलती है, यह हर रोज बदलती है।

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