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यादें! चल ताज़ा हो ले।

Hemant BondreHemant Bondre August 24, 2022
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अलसाई सुबह जी सबसे पहले याद आती है।

जिसकी आमद की खुशबू से ही ताज़गी छाती है।।

मौसम कोई भी हो रंगत उसी की भाती है।

वो चाय ही है दोस्तों जो हर उम्र में साथ निभाती है।।

ऐसे ही नहीं ये हर घर मे राज़ करती है।

बाग़ान से मर्तबान तक का लंबा सफ़र जो तय करती है।।

मेज़बान की मर्ज़ी से ख़ुद को रंगती है।

और जुबाँ से लगते ही सीधे दिल मे उतरती है।।

चाय की गर्मी से बचपन में माँ सर्दी भगाती है।

जब भीगे है दोस्त सारे, बारिश की बूंदों से।।

तो टपरी की चाय ही गरमाहट लाती है।।

सब सो जाते है, जब पढ़ते वक्त यारों के साथ।

रात के उन पहरों में भी चाय ही जगाती है।।

ऑफिस कैंटीन में जब साथियों की महफ़िल जमती है।

चाय के हर में क़िस्सों की परतें खुलती है।।

चाय, साँवला रंग और गर्म तासीर रखती है।

पर रिश्ते बनाने और मुद्दे सुलझाने में, मेज़ पर यही सजती है।।

संबंधों की नींव भी तो चाय पर ही रखी होती है।

तभी तो कुँवारे हाथों में, भावी साथी के लिए चाय ही होती है।।

उत्सव की रात, चाय खुशी में खौलती है।

तो ग़म की स्याह रात में, ये अपनी दोस्ती निभाती है।।

आज हर गली -नुक्कड़ चाय के रंगों से सजती है।

यारों की यारी के लिये ही चाय, कुल्हड़ से छलकती है।।

न जाने कितने ही भावों का पर्याय बनती है।

तभी तो हर रिश्ते की गर्माहट से हमें हरदम ताज़ा रखती है।

......तो दोस्तों हमने चाय बना दी.......!

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